वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026 में मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ी राहत का ऐलान किया है। नई टैक्स व्यवस्था के तहत अब ₹12 लाख तक की सालाना आय पर कोई आयकर नहीं देना होगा। यह पहले ₹7 लाख थी।
नई टैक्स स्लैब 2026
| सालाना आय | टैक्स दर |
|---|---|
| ₹0 – ₹4 लाख | शून्य (0%) |
| ₹4 – ₹8 लाख | 5% |
| ₹8 – ₹12 लाख | 10% |
| ₹12 – ₹16 लाख | 15% |
| ₹16 – ₹20 लाख | 20% |
| ₹20 – ₹24 लाख | 25% |
| ₹24 लाख से ऊपर | 30% |
सरकार ने ₹12 लाख तक की आय पर धारा 87A के तहत पूर्ण छूट दी है। यानी अगर आपकी आय ₹12 लाख है और स्लैब के हिसाब से कुछ टैक्स बनता भी है, तो रिबेट के जरिए वह शून्य हो जाएगा।
किसे सबसे ज़्यादा फायदा?
विश्लेषकों के अनुसार इस बदलाव से देश के लगभग 12 करोड़ करदाताओं को सीधा फायदा मिलेगा। खासतौर पर वे सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारी जिनकी सैलरी ₹8 से ₹15 लाख के बीच है, उनके हाथ में अब ज़्यादा पैसा बचेगा।
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी की सालाना सैलरी ₹10 लाख है तो पिछले बजट में उसकी टैक्स देनदारी लगभग ₹54,600 थी। नए स्लैब के बाद यह शून्य हो जाएगी — यानी सीधे ₹54,600 की बचत।
नई बनाम पुरानी टैक्स व्यवस्था
पुरानी टैक्स व्यवस्था में HRA, LTA, 80C जैसी कई छूट मिलती हैं। लेकिन अब नई व्यवस्था में ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ ₹12.75 लाख तक टैक्स जीरो है, इसलिए ज़्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए नई व्यवस्था फायदेमंद होगी।
वित्त मंत्री ने कहा, "यह बजट मध्यम वर्ग की खर्च क्षमता बढ़ाएगा और आर्थिक विकास को गति देगा।" GDP में उपभोग का योगदान बढ़ने की उम्मीद है, जो 2026-27 में GDP को 7.2% तक ले जा सकता है।